तुम भी बदलते जा रहे हो





हवाओं के साथ चलते जा रहे हो

 

बहुत आगे निकलते जा रहे हो

 

चले जाओ मगर ये तो बता दो

 

ये रस्ते क्यों बदलते जा रहे हो?

 

खुद अपने हाथों से वो पुल जलाये

 

तो अब क्यों हाथ मलते जा रहे हो

 

हमें समझा रहे हो प्यार से तुम

 

सुनो! तुम भी बदलते जा रहे हो

 

उठा कर बोझ कन्धों पर

 

सुना है फिर संभलते जा रहे हो

 

लगी है चोट दिल पर कोई जैसे
 




मुस्कुरा कर फिर भी चलते जा रहे हो

 

जान पहचान तो अब भी है

 

पर वो तालुकात नहीं

 

रिश्ता अब भी है मगर

 

अब वो बात नहीं

 

रेत की तरह हाथों से फिसलते जा रहे हो

 

ऐ दोस्त! तुम भी बदलते जा रहे हो।

 

~ ईशा राइ

 


Image Source: Pixabay.com


 

 


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