Posts by Kallol Mukherjee

भारत की हत्या

“कभी कभी लगता है… लगता है कि वो है ही नहीं।” “देखो उसके घर देर है अंधेर नहीं।” “हुह!!” एक महीने पहले बापू “हुह!!” को अपना आखरी शब्द बनाकर दिल्ली

*यादों का सफ़र*

  “मेट्रो या ऑटो?” “ऑटो।” “वैसे मेट्रो में भी जा सकते हैं, अभी रात के 11 ही बजे हैं। भीड़ भी नहीं होगी और एअरपोर्ट एक्सप्रेस वे से 30 मिनट